गंध के बारे में कैसे पता करें
कई बार दूसरों के सामने मुंह से आने वाली गंध शर्मिंदगी का कारण बनती है। इसके बारे में पता लगाने के लिए आप अपने फैमिली मेंबर यो क्लोज फ्रेंड से फूछ सकते हैं। वहीं अपनी कलाई को चाटकर या लंबी सांस लेकर छोड़ने के बाद इसे तुरंत सूंघे। इससे भी आपको पता चल जाएगा कि आपकी सांसों से बदबू आ रही है या नहीं।
बीमारियों की निशानी
लिवर और किडनी जैसे अंग हमारे शरीर से टॉक्सिक पदार्थों को फिल्टर करके बाहर निकालने का काम करते हैं। जब किसी बीमारी के चलते यह अंग सही से काम करना बंद कर देते हैं तो हमारे शरीर में टॉक्सिक तत्वों की मात्रा बढ़ने लगती है। जिसके कारण सांसों में बदबू आने लगती है। सांसों की गंध हर बीमारी में अलग-अलग होती है। इसको अनदेखा करने से लिवर, किडनी से लेकर ब्रेन तक में डैमेज की समस्या बढ़ जाती है।
फलों जैसी गंध
कई बार डायबिटीज की बीमारी पर ध्यान न देने से डायबिटिक कीटोएसिडोसिस हो जाता है। यह ग्लूकोज कोशिकाओं के लिए ईंधन की तरह काम करता है। जब शरीर में इंसुलिन की मात्रा कम हो जाती है तो बॉडी में जमा फैट को लिवर एनर्जी के तौर पर इस्तेमाल करता है। इससे खून में एसिडिक बनना शुरू हो जाता है। जिससे केमिकल कीटोंस की गंध तेज होती है और कई बार यह जानलेवा भी साबित होती है। डाइटिंग, व्रत या फिर कई बार देर से खाना खाने की आदत होने पर भी कीटोंस की मात्रा बढ़ती है। जिससे सांसों में गंध पैदा हो जाती है।
कचरे जैसी बदबू
कई बार सांसों से कचरे जैसी तेज दुर्गंध आने लगती है। ऐसी स्थिति में गले या फेफड़े में इंफेक्शन, पस भरने आदि से मुंह से कचरे जैसी दुर्गंध आने लगती है। फेफड़ों तक हवा पहुंचाने वाली नलियों के डैमेज होने पर बैक्टीरिया हमारे सांसों तक पहुंच जाती हैं। वहीं श्वांस वाली नलियों में बलगम फंसा होने के कारण भी इस तरह की बदबू आने लगती है। किडनी, फेफड़े, खून की नलियों और ENT के संक्रमण से जुड़ी एक बीमारी को ग्रैनुलोमैटोसिस कहते हैं। इससे बॉडी में ब्लड सर्कुलेशन ठीक नहीं रहता। जिसके कारण ऐसी तेज बदबू आने लगती है।
नेल पॉलिश रिमूवर जैसी गंध
कई लोग डायटिंग के दौरान कम कार्ब्स वाला खाना खाते हैं। कार्बोहाइड्रेट्स का लेवल कम होने के कारण शरीर फैट एनर्जी में बदलने लगता है। इस दौरान शरीर में एसिटोन केमिकल बनता है, जो नेल पॉलिश रिमूवर की तरह महकता है।
खट्टी गंध वाली सांसें
हमारे खाने को पेट तक पहुंचाने का काम आहार नली करती है। एसिड रिफ्लेक्स यानी GERD की समस्या से पीड़ित लोगों में आहार नली ठीक से बंद नहीं होने के कारण पेट में आधा-अधूरा पचा खाना अक्सर मुंह और गले तक आने लगता है। जिसके कारण खट्टी गंध वाली सांसे आने लगती हैं।
सांसों में मल जैसी बदबू
खाना पचने के बाद जो खाने का हिस्सा बच जाता है वह हमारे शरीर से बड़ी आंत के जरिए बाहर निकलता है। लेकिन जब इसमें रुकावट पैदा होती है तो कब्ज की शिकायत होने लगती है। इस दौरान पेट फूलना, पेट में दर्द या मरोड़ उठना और उल्टी आदि की समस्या होती है।
सांसों से अमोनिया या यूरिन जैसी गंध
कई बार चोट या किसी दूसरी बीमारी के कारण किडनी डैमेज हो जाती है। जिसके कारण डैमेज किडनी हमारे शरीर से नाइट्रोजन और दूसरे केमिकल्स को बाहर नहीं निकाल पाती है। ऐसा होने पर सांसों से अमोनिया या यूरिन जैसी दुर्गंध आने लगती है। इस बीमारी को एज़ोटेमिया के नाम से भी जानते हैं।
सीलनभरी सांसें
कई बार आपने महसूस किया होगा कि सांसों से सीलनभरी गंध आने लगती है। जब सिरोसिस जैसी बीमारियों में लिवर जहरीले तत्वों को फिल्टर नहीं कर पाता है तो खून में सल्फर की मात्रा बढ़ने लगती है। इसे ब्रीद ऑफ डेड भी कहते हैं।
जली चीनी जैसी गंध
कई बार ल्यूसिन, आइसोल्यूसिन और वेलिन जैसे एमिनो एसिड्स को बॉडी पचाकर एनर्जी में कन्वर्ट नहीं कर पाती है। इस बीमारी को मेपल सिरप यूरिन डिजीज कहा जाता है। आपको बता दें कि यह बीमारी इतनी घातक होती है कि कई बार इससे पीड़ित व्यक्ति के दौरे या कोमा में जाने की संभावना बन जाती है। कई बार समय से इलाज न मिलने पर ब्रेन डैमेज की भी संभावना होती है।
सड़ी मछली जैसी बदबूदार सांसें
ट्राइमेथीलेमिन्यूरिया नामक बीमारी शरीर में ट्राइमेथिलमाइन को तोड़कर नहीं पचा पाती है। जिसके कारण सांसों से पसीने या फिर सड़ी हुई मछली की तरह बदबू आने लगती है।
उबली पत्तागोभी जैसी गंध
सांसों से गंध आने का कारण जेनेटिक डिसऑर्डर भी हो सकता है। हाइपरमेथाइनिनमिया बीमारी से पीड़ित लोगों की सांसों से उबले हुए पत्तागोभी की तरह बदबू आने लगती है।
जानिए क्या कहते हैं डॉक्टर्स
प्रोस्थोडॉन्टिस्ट डॉ. रविंदर का कहना है कि यदि आपको कोई अन्य बीमारी नहीं है तो इसका एक ही इलाज है। जिन लोगों के मुंह से बदबू आती है उन्हें अपनी जीभ, मुंह, मसूढ़े और दांतों को साफ रखना चाहिए। माउथवॉश का इस्तेमाल करने से बदबू पैदा करने वाले बैक्टीरिया की कम हो जाते है। हालांकि यह इसका स्थाई उपाय नहीं है। बहुत ज्यादा माउथवॉश के इस्तेमाल के भी अपने नुकसान होते हैं। इसलिए ज्यादा माउथवॉश का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
ऐसे करें इसका इलाज
एक कप एलोवेरा जूस में आधाकप पानी मिलाकर रोज इससे कुल्ला करना चाहिए। इसके अलावा आप आधे गिलास गुनगुने पानी में नमक डालकर भी कुल्ला कर सकते हैं। इससे भी आपको सांसों में आने वाली बदबू से राहत मिलेगी। आधा ग्लास गुनगुने पानी में बेकिंग सोडा मिलाकर आप सांसों की बदबू से बच सकते हैं।